27
May

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मैं – मेरापन कैसे मिटे ?

मैं – मेरापन कैसे मिटे ?

मैं शरीर हूॅ, शरीर मेरा है-यह मान्यता ही खास भूल है। यही मूल भूल है। आप विचार करें कि शरीर मिला है और मिली हुई चीज अपनी नहीं होती। अपनी चीज सदा ही अपनी रही है, कभी बिछुड़ती नहीं; शुरू से अन्ततक अपनी रहती है। परंतु मिली हुई चीज सदा साथ नहीं रहती, बिछुड़ जाती […]

27
May

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अपने अनुभव का आदर

अपने अनुभव का आदर एक बहुत सीधी-सरल और सबके अनुभव की बात है। केवल उसका आदर करना है, उसको महत्व देना है, उसको कीमती समझना है। जिस तरह आपने रूपया, सोना, चाॅदी, हीरा, पन्ना आदि को कीमती समझ रखा है, इस तरह इस बात को कीमती समझो, इसको महत्व दो तो अभी इसी क्षण उद्धार […]

31
Mar

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मैं – मेरापन कैसे मिटे ?

मैं शरीर हूॅ, शरीर मेरा है-यह मान्यता ही खास भूल है। यही मूल भूल है। आप विचार करें कि शरीर मिला है और मिली हुई चीज अपनी नहीं होती। अपनी चीज सदा ही अपनी रही है, कभी बिछुड़ती नहीं; शुरू से अन्ततक अपनी रहती है। परंतु मिली हुई चीज सदा साथ नहीं रहती, बिछुड़ जाती […]