Our Mission

श्री कृष्ण ने स्वयं भगवद्गीता में कहा है।

य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति। भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः।। न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः। भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि।।

अर्थात् जो मुझमें भक्ति करके इस परम गोपनीय संवाद (भगवद्गीता) का दूसरों में प्रचार करेगा वह मुझे ही प्राप्त होगा-इसमें कोई सन्देह नहीं है। उसके समान मेंरा अत्यन्त प्रिय कार्य करने वाला मनुष्यों में कोई भी नहीं है और भूमंडल पर उसके समान मेरा कोई प्रियतर होगा भी नहीं (गीता 18.68-69)। अतः यह संस्था अपनी पूरी बुद्धि, कौशल, भाव और कृष्ण-कृपा से गीता प्रचार में जुट जाये। आने वाले पाॅंच सालों में श्री कृष्ण की कृपा से यह संस्था इस दिशा में सम्पूर्ण देश में चेष्टा करती हुई दिखे और आगे के पाॅंच सालों में विश्व में प्रचार करने लगे। इस प्रचार के लिये सभी संसाधनों का श्रेष्ठतम ढंग से आश्रय लें, यथा परम्परागत (पुस्तक, कक्षाओं) Digital एवं Social Media संसाधनों का।

Our Vision

ऐसा वातावरण बनाना जिसमें लोग भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की चेष्टा में लगे रहें। शरीर छोड़ने तक स्वयं का भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की चेष्टा करते रहने का स्वभाव बना लेना और दूसरों को भी ऐसा करने के लिये भरसक योगदान और अवसर प्रदान करना।