ऐसा वातावरण बनाना जिसमें लोग भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की चेष्टा में लगे रहें। शरीर छोड़ने तक स्वयं का भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की चेष्टा करते रहने का स्वभाव बना लेना और दूसरों को भी ऐसा करने के लिये भरसक योगदान और अवसर प्रदान करना।