31
Mar

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मैं – मेरापन कैसे मिटे ?

मैं शरीर हूॅ, शरीर मेरा है-यह मान्यता ही खास भूल है। यही मूल भूल है। आप विचार करें कि शरीर मिला है और मिली हुई चीज अपनी नहीं होती। अपनी चीज सदा ही अपनी रही है, कभी बिछुड़ती नहीं; शुरू से अन्ततक अपनी रहती है। परंतु मिली हुई चीज सदा साथ नहीं रहती, बिछुड़ जाती […]