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लोग मूर्ति पूजा क्यों करते हैं?

हरे कृष्ण !!

एक बड़ा सवाल जो सबके मन में आता होगा –

लोग मूर्ति पूजा क्यों करते हैं?

 

हमारे सनातन वैदिक सिद्धान्त में भक्तलोग मूर्ति का पूजन नहीं करते, प्रत्युत परमात्मा का ही पूजन करते हैं। तात्पर्य है कि परमात्मा के लिये मूर्ति बनाकर उस मूर्ति में उस परमात्मा का पूजन करते हैं, जिससे सुगमतापूर्वक परमात्मा का ध्यान-चिन्तन होता रहे।

अगर मूर्ति की ही पूजा होती है तो पूजक के भीतर पत्थर की मूर्ति का ही भाव होना चाहिये कि ‘तुम अमुक पर्वत से निकले हो, अमुक व्यक्ति ने तुमको बनाया है, अमुक व्यक्ति ने तुमको यहाँ लाकर रखा है; अतः हे पत्थरदेव! तुम मेरा कल्याण करो।’ परन्तु ऐसा कोई कहता ही नहीं तो फिर मूर्तिपूजा कहाँ हुई? अतः भक्तलोग मूर्ति की पूजा नहीं करते; किंतु मूर्ति में भगवान् की पूजा करते हैं अर्थात् मूर्तिभाव मिटाकर भगवद्भाव करते हैं। इस प्रकार मूर्ति में भगवान् का पूजन करने से सब जगह भगवद्भाव  हो जाता है। भगवत्पूजन से भगवान् की भक्ति का आरम्भ होता है।

क्या आप जानना चाहते हैं की भगवद्गीता को समझने से कैसे आपका जीवन बदल सकता है ?

मूर्ति में अपनी पूजा के विषय में भगवान् ने गीता में कहा है कि

भक्तलोग भक्तिपूर्वक मेरे को नमस्कार करते हुए मेरी उपासना करते हैं (9.14); जो भक्त श्रद्धा-प्रेमपूर्वक पत्र, पुष्प, फल, जल आदि मेरे अर्पण करता है, उसके दिये हुए उपहार को मैं खा लेता हूँ। (9.26)

 

अगर सामने मूर्ति न हो तो किसको नमस्कार किया जायगा? किसको पत्र, पुष्प, फल, जल आदि चढ़ाये जायँगे और किसका पूजन किया जायगा? इससे यही सिद्ध होता है कि गीता में मूर्तिपूजा की बात भी आयी है।

इसी तरह गाय, तुलसी, पीपल, ब्राह्मण, तत्त्वज्ञ जीवन्मुक्त, गिरिराज गोवर्धन, गंगा, यमुना आदि का पूजन भी भगवत्पूजन है। इनका पूजन करने से ‘सब जगह परमात्मा हैं’ यह बात सुगमता से अनुभव में आ जाती हैं; अतः सब जगह परमात्मा का अनुभव करने में गाय आदि का पूजन बहुत सहायक है। कारण कि पूजा करने वाले ने ‘सब जगह परमात्मा हैं’-ऐसा मानना तो शुरू कर दिया है। तात्पर्य है कि मूति में भगवान् का पूजन करना कल्याण का, श्रेय का साधन है।

भगवत्पूजन के सिवाय हाड़-मांस की पूजा करना अर्थात् अपने शरीर को सुन्दर-सुन्दर गहनों-कपड़ों से सजाना, मकान को बढ़िया बनवाना तथा उसे सुन्दर-सुन्दर सामग्री से सजाना, श्रृंगार करना आदि मूर्ति-पूजा ही है, जो कि पतन में ले जाने वाली है।

हरे कृष्ण !! 

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